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About Purvanchal

पूर्वांचल भारत की सबसे प्राचीन क्षेत्रों में से एक है और विशेष रूप से वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, बस्ती आदि जैसे शहरों के आपसी सहयोग की वजह से, एक समृद्ध विरासत और संस्कृति एवं समृद्धि प्राप्त है, इस क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास बहुत कम है क्योंकि लोग जात विरादिरी की राजनीतिक में लड़ रहे हैं और एक विशाल जनसंख्या जो की प्रमुख मुद्दों नागरिक बुनियादी सुविधाओं की कमी, उचित ग्रामीण शिक्षा और रोजगार की कमी महसूस कर रहे हैं। धूमिल कानून-व्यवस्था भी एक प्रमुख चिंता का कारण है। उत्तर प्रदेश सरकार और भारत की केन्द्रीय सरकार की ओर से कुछ योजनाएं चालू की गयी है जो की क्षेत्र को आगे ले जा सकती है |

इस क्षेत्र ने भारत की आजादी की लड़ाई में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मंगल पांडे इस क्षेत्र से सबसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों, जिनको पूर्वांचल के सच्चे पुत्र के रूप में जाना जाता है। लोकप्रिय संस्कृति में, पूर्वांचल और साथ ही "योद्धाओं की भूमि" में के रूप में जाना जाता है। हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के लिए भी ये क्षेत्र बहुत महत्व पूर्ण है ।

संत रविदास नगर, भदोही और मिर्जापुर कालीन निर्माण में प्रमुख स्थान हैं। साथ ही वाराणसी, कुशीनगर, इलाहाबाद और गोरखपुर भारतीय पर्यटन का एक केंद्र है। सोनभद्र, उत्तर प्रदेश 7000 मेगावाट बिजली, लगभग उत्तर प्रदेश के राज्य में कुल बिजली उत्पादन का आधा बिजली पैदा करता है। वाराणसी और कुशीनगर उत्तर प्रदेश का दौरा कुल पर्यटकों का 65% से अधिक आकर्षित करती हैं। मिर्जापुर और सोनभद्र प्राकृतिक संसाधनों के साथ बहुत अमीर हैं।

पूर्वांचल का इतिहास

ऐतहासिक रूप से पूर्वांचल में काशी नरेश का राज्य था जिनके राज्य में मिर्जापुर, चंदौली, बलिया, मऊ, ग़ाज़ीपुर, सोनभद्र, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, जौनपुर, भदोही, गोरखपुर का कुछ भाग, बस्ती और संत कबीर नगर था | इस क्षेत्र में प्रमुख रूप से भूमिहार और मुगलों का शासन रहा |

पर्यटन

घरेलू पर्यटक की संख्या के आधार पर पूर्वांचल भारत में सबसे प्रमुख क्षेत्र है जो यहाँ के संस्कृति, इतिहास, भवन, पर्व और पूजा के तरीको के वजह से लोगो को आकर्षित करता है | लाखो लोग हर वर्ष संगम स्नान के लिए अलाहाबाद माघ मेला में आते है और यह हिंदुओं का सबसे बड़ा जमावड़ा दर्ज हो चूका है पुरे विश्व में |

गोरखपुर के नजदीक कुशीनगर और सारनाथ का अपना महत्व है| महात्मा बुद्धा ने सारनाथ में प्रथम शिक्षा दिया और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण लिया |